Thursday, 17 January 2019

सामाजिक सुरक्षा के विशेषता, प्रकार, उपाय

सामाजिक सुरक्षा


किसी ने सही कहाँ है की मनुष्य की जीबन का कोई भी भोडोसा नहीं है, कभीभी कुछ भी हो सकता है। और वही दूसरी ओर आज का जो आधुनिक समय है वहाँ व्यक्ति के जीबन की निशयता और भी ज्यादा कम है। इसी आधुनिक समाज व्यबस्था के विकाश के कारण ही आज सामाजिक सुरक्षा की संकल्पना का विकाश अति तेज़ गति से हो रहा है।

लकिन सामाजिक सुरक्षा अचल में किसको कहलाता है ? क्या आप जानना नहीं चाहोगे ? दोस्तों आजके हामारे इस लेख का मूल विषयबस्तु यही है। इस लेख में हम सामाजिक सुरक्षा के विशेषता, प्रकार, उपाय इन सभी चीज़ो को अच्छे से जानेंगे। लकिन इन सब विषयो को अध्ययन करने से पहले ये अचल में क्या है जान लेते है चलिए।
सामाजिक सुरक्षा के विशेषता, प्रकार, उपाय

आधुनिक समाज जीवन में व्यक्ति के ऊपर कभीभी कुछ भी विपदा सकती है, वो विपदा कुछ भी सकता है। जैसे की दुर्घटना, नौकरी चली जाना, अपना धन-दौलत गवा बैठना, रोगग्रस्त होना, मृत्यु होना इत्यादि इत्यादि। सामाजिक सुरक्षा एक ऐसा व्यबस्था है जिसके जरिए इन समस्याओ से जुंग रहे व्यक्तिओ को समस्या से उभरने में मदद की जाती है।

लकिन हाँ आपको पहले ही बता देना चाहता हु की इस व्यबस्था के जरिए व्यक्ति को लाभ लेने के लिए पहले से ही मूल्य देके रखना पड़ता है। इस व्यबस्था का एक अति सरल और सर्बपरिचित उदाहरण है LIC (Life Insurance Corporation of India). 

Related Articles: -

Tuesday, 15 January 2019

महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण

आधुनिक लोकप्रिय समजतात्विक संकल्पनाओं में से महिला सशक्तिकरण एक बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय संकल्पना है। एक समय था जब केबल शारीरिक रूप से दुर्बल होने के कारण महिलाओ को पुरषो की तुलना में निम्न सामाजिक स्थान प्रदान किआ जाता था।

लकिन बिस्व की समाज व्यबस्थाऔ में जब से आधुनिकीकरण की गति तेज होने लगी है तबसे महिलाओ को भी धीरे धीरे वो सारे अधिकार प्राप्त होने लगी है; जो सारे अधिकार एक पुरुष को समाज में प्राप्त होता है।

महिला सशक्तिकरण संकल्पना पूर्ण रूप से बिस्व की महिला जाती को शक्तिशाली करने का समर्थन करता है। इस अबधारणा के अनुसार एक नारी को कभी भी पुरषो की तुलना में निम्न नहीं माना जा सकता।

महिला सशक्तिकरण
Source
हाँ ये बात सत्य है की प्रकृति नारी को पुरुष की शारीरिक शक्ति की तुलना में थोड़ा दुर्बल करके सृजन करता है लकिन इसका अर्थ ये नहीं की वे मानसिक रूप से भी दुर्बल ही हो।

एक महिला वो हर काम कर सकती है जो पुरुष कर सकता है। और आज कल तो शारीरिक दिशाओ में भी ये काफी शक्तिशाली होने लगी है। मल्ल यूद्ध, बॉक्सिंग, इत्यादि क्रियाओ में महिलाये अंश ग्रहण करके आज देश और समाज को भी ये गर्वित कर रही है। उदाहरण: - मैरी कॉम (मणिपुर की), हिमा दास (असम की) इत्यादि। 

अगर हम इस अवधारणा को एक ही वाक्य में प्रकाशित करने की कोसिस करे तो कह सकते है की महिला सशक्तिकरण वो एक उपाय या प्रक्रिया है दुवारा समाज की महिलाओ को आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, मानसिक सभी दिशाओ में शक्तिशाली रूप से विकशित किआ जा सकता है।     

Related Articles: -

महिला सशक्तिकरण की विसेषता

1. सामाजिक समस्या का समाधान: - महिलाओ को शोषण करना, सामाजिक अधिकारों से बंचित करना, पुरषो के तुलना में निम्न स्थान प्रदान करना ये सारे एक एक सामाजिक समस्या है। जब महिला सशक्तिकरण की बात आती है तब सबसे पहले इन समस्याओ से उनको मुक्त करने की कोसिस किआ जाता है।

इन समस्याओ से महिलाओ को मुक्त किए बिना कोई भी सशक्तिकरण आंदोलन संभव नहीं है। इसीलिए ये इस संकल्पना का प्रथम मुख्य विशेषता है।


2. समान अधिकार प्रदान: - महिलाओ की सारी समस्याओ का मुख्य केंद्र है पुरुष केंद्रिकता। अर्थात ज्यादातर समाजो की नीति-नियमो को पुरषो के दुवारा नियंत्रित किआ जाना। इसके कारण पुरुष ज्यादातर नीति-नियम ऐसे तैयार करते की महिलाओ को इसके दुवारा अपने से निचे रखा जाये।

महिला सशक्तिकरण पुरषकेंड्रिक समाजो की इन आत्मकेन्द्रिक नीतिओ को पूर्ण रूप से विरोध करती है। और समाज में पुरुष-नारी की सामान अधिकार का समर्थन करती है। 


3. आधुनिक सोच के ऊपर प्रतिष्ठित: - आधुनिक सोच युक्ति तर्क के ऊपर प्रतिष्ठित होता है। आधुनिकताबाद हमेशा ही अयौक्तिकता को नकारता आया है। भारतीय समाज में आधुनिकीकरण की गति तेज़ होने से पहले की समाज व्यबस्था को अगर आप देखोगे तो आपको पता चलेगा की उस समय समाज में महिलाओ की अवस्था अति दुर्बल थी।

महिलाओ को शोषण करना, अत्याचार करना, सामाजिक अधिकार से वंचित करना, ये हर एक सोच अयौक्तिक है। महिला सशक्तिकरण हमेशा ही इन सोचो को बिरोध करता है क्योकि इस संकल्पना को जो संकल्पना इंधन प्रदान करता है वो है अधुनिकताबाद; जो पूर्ण रूप से यौक्तिक सोच के ऊपर प्रतिष्ठित है। 

जरा आप खुद सोचिए अगर आज हामारे समाज व्यबस्था में आधुनिकीकरण तीब्र नहीं होता तो क्या महिलाओ को वो सारे अधिकार और सम्मान प्राप्त होता जो आज उनको प्राप्त हो रहा है।


4. महिलाओ की सम्मान बृद्धि: - जब तक किसी व्यक्ति के ऊपर अत्याचार होता रहेगा, शोषण होता रहेगा तब तक उस व्यक्ति को समाज में कभी भी उच्च सम्मान प्राप्त नहीं होगा और ना ही कभी संभव हो पायेगा।

महिला सशक्तिकरण एक ऐसा उपाय है जिसके माध्यम से महिलाओ के ऊपर हो रहे सारे के सारे अत्याचार, शोषण इत्यादि को निर्मूलकरण किआ जा सकता है। इसके दुवारा उनकी सम्मान में बृद्धि भी होती है और उनको उच्च सामाजिक स्थान की भी प्राप्ति होती है।   

महिला सशक्तिकरण के तरीके

1. शिक्षा की व्यबस्था: - एक व्यक्ति को पूर्ण से मानब बनके जीने के लिए जिस चीज़ की सबसे ज्यादा जरूरत है वो है शिक्षा। शिक्षा दुवारा व्यक्ति ये अनुभव कर पाता है की वो अचल में कौन है। एक समय था जब महिलाओ को स्कूल, कॉलेज जाने नहीं दिआ जाता था। उस समय जब माता-पिता तथा घरवाले ये मानके चलते थे की बच्ची स्कूल जाके क्या करेगी? एक ना एक दिन तो शादी करके किसी दूसरे घरपे चली जाने ही पड़ेगी।

इसीलिए स्कूल जाने अच्छा है की घर में रहकर वर्तन धोना, कपडे धोना, खाना बनाना, बच्चे पालना ये सब सिख ले। उस समय में समाज की इन्ही सोचो के वजह से महिलाओ को अपने अधिकारों से वंचित होके रहना पड़ता था।

लकिन आज समय बदल सुका है देश का कानून, व्यक्तिओ के सोच इत्यादि उनको भी उच्च शिक्षा ग्रहण करने की अनुमति प्रदान कर रही है। इसी कारण आज भारत जैसे देशो की महिलाये भी बिस्व में अपना नेतृत्व देने को शक्षम हो रही है। उदाहरण: - इंदिरा नुई (Pepsico Chaiman), चंदा कोच्चर ( MD and chief executive officer of ICICI Bank) इत्यादि।

ये बहुत ही ज्यादा दुःख की बात है की कुछ कुछ समाजो में अभीभी ऐसा परंपरा मौजूद है, जहा नारीओ को उच्च शिक्षा ग्रहण करने नहीं दिआ जाता है। हालाकि आशा किआ जाता है की अति कम समय के भीतर आधुनिकीकरण की वजह से उन सारे जगहों पर भी ये सारे परम्पराए ख़तम होंगी।