Thursday, 16 May 2019

कामाख्या मंदिर की अद्भुद कहानी


कामाख्या मंदिर की अद्भुद कहानी


दोस्तों हम सभी तो कामाख्या मंदिर के साथ पहले से ही परिचित है। लेकिन क्या हम सब इस मंदिर से जुड़े हुए उस अद्भुद कहानी को जानते है जिसके कारण पुरे भारतवर्ष तथा विश्व में इसको अनन्य माना जाता है ?

अगर आप भी इससे जुड़े हुए उस कहानी को पहले से नहीं जानते तो हमें यकीन की आपको ये लेख बहुत ही पचंद आएगा। तो चलिए आज हम कामाख्या मंदिर से जुड़े हुए उस अद्भुद कहानी को ही जानने का प्रयास करते है। 
कामाख्या मंदिर की अद्भुद कहानी

कहानी का प्रथम भाग

इस कहानी प्रारम्भ होता है असुर राज दक्ष बेटी सटी की प्रेम कथा से। इस प्रेम कथा के एक तरफ था भगवान शिव और दूसरी तरफ थी देवी सटी; लेकिन इन दोनों किनारो के बिच एक दीवार भी खड़ा था जो था सटी देवी के पिता यानि दक्ष महाराज।

सटी देवी भगवान शिव से प्रेम करती थी तथा मन ही मन उनको अपना पति भी मान सुकि थी लेकिन इस बात को अपने पिता के समक्ष बोलने से घबराती थी क्योकि दक्षराज भगवान शिव को देवताओ में सबसे निम्न दर्जे का मानते थे और इसी कारण उनसे घृणा करते थे। 

सटी जानती थी की दक्ष कभी भी शिव से उसको विवाह की अनुमति प्रदान नहीं करेगा। हालाकि अभी तक दक्ष को इस प्रेम कथा के बारे में पता नहीं चला था।

लेकिन इसी बिच एक दिन दक्षराज को अपने गुप्त अनुसरो से इस बात का पता चला जिससे वे काफी क्रोधित हुए और साथ ही अपनी बेटी को ये चितावनि भी दे डाली की अगर उसने शिव के साथ अपने सम्बन्ध का त्याग नहीं किआ तो भविश्व वो उसके साथ अपने सम्बन्ध को हमेशा हमेशा के लिए ख़तम कर देगा। 

लेकिन दक्षराज के इतने चेतावनिओ के बाद भी सटी ने शिव का त्याग नहीं किआ और एक दिन गन्धर्व रीती के अनुसार उन दोनों ने विवाह रचाया।

अब आते है कहानी के दूसरे भाग पर -

Saturday, 11 May 2019

भक्ति काल के कवि


भक्ति काल के कवि (bhakti kaal ke kavi)


दोस्तों इस लेख में हम भक्ति काल के 5 मुख्य कविओ के साथ परिचित होंगे, जिन्होंने हिन्दू धर्म के अंदर रहकर ही इस महान धर्म संस्कार आंदोलन को एक नया मोड़ प्रदान किआ।

तो चलिए ये दस महान कवि कौन कौन थे, एक एक करके जानने की कोसिस करते है।

1. श्रीमंत शंकरदेव : - हाँ ये हमे ज्ञात है की शायद भारत के सभी हिस्सों के सामान्य लोग इस महान पुरुष के साथ पहले से ही परिचित नहीं होंगे लेकिन दोस्तों आपकी जानकारी के लिए बता देना चाहता हु की श्रीमंत शंकरदेव भक्ति काल के एक महान कवि तथा नेता थे।

इस महान नेता का जनम हुआ था सं 1449 में भारतवर्ष के असम राज्य में स्थित नगाओं ज़िले में। श्रीमंत शंकरदेव उनके दुवारा रचित बोरगेतो के वजह से आज भी पुरे भारतवर्ष के बौद्धिक जगत में जाने जाते है। हालाकि असम राज्य के समाम्न्य लोगो के बिच भी ये कवि अत्यंत विख्यात है।

इन्होने असम के लिए अपना जो जो भी योगदान दिआ था, उन सबके लिए इनको आज भी असम के लोग महापुरुष शब्द से बिभूषित करते है। इस महान कवि दुवारा रचित सबसे पहला बोरगीत था 'मन मेरी राम चरणेहि लागु'.
भक्ति काल के कवि, bhakti Kaal ke Kavi

2. चैतन्य महाप्रभु : - भक्ति काल के इस महान कवि का जनम हुआ था पश्चिम बंगाल में सं 1486 के 18 फेब्रुअरी को।  चैत्यन्य महाप्रभु को तो कुछ कुछ लोग भगवान का दर्जा भी देते है।

इन्होने भजन गायिकी को एक नया रूप प्रदान करके पौराणिक हिन्दू धर्म में स्थित बिभिन्न प्रकार के अंधविस्वास और कु-संस्कारो के विरुद्ध अपना आवाज़ उठाया।

भारतवर्ष में उस समय चल रहे राजनैतिक अस्थिरता को दूर करने के लिए उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम के बिच सद्भावपूर्ण भावना के विकाश के लिए भी कोसिस किआ। दोस्तों क्या आप जानते है की किसके बदौलत आज बृंदाबन पुरे भारतवर्ष तथा दुनिआभर में विख्यात है?

ये चैतन्य महाप्रभु ही है जिसने बृंदाबन के ख़तम होने वाले अस्तित्व को पुनः उद्धार किआ और अपने जीवन के आखरी भाग भी एहि पर व्यतीत किआ।

Saturday, 4 May 2019

संचार या कम्युनिकेशन क्या है ?


संचार क्या है ?


समाजशास्त्रीक परिभाषाओ में से एक और अन्यतम है 'संचार या कम्युनिकेशन', तो फिर क्या होता है संचार ? आज हम इसी विषय के ऊपर चर्चा करेंगे। क्या आप इच्छुक हो?

तो चलिए सबसे पहले इस प्रश्न का उत्तर ढूंढ़ने की कोसिस करते है।

हम इंसान सामाजिक प्राणी है। समाज में रहकर ही हम अपना जीबन यापन करते है, इसके कारण हम बिभिन्न उद्देश्यों को केंद्र करके बिभिन्न लोगो से बात चित करते है, अलाप-आलोचनाए करते है। 

दोस्तों हम इंसान इसीलिए ये सब करते है ताकि हम अपने बिभिन्न उद्देश्यों को पूरा कर पाए।

इसीलिए कम्युनिकेशन या संचार वो उपाय होता है जिसके जरिए हम अन्य इंसानो के साथ अपने अनुभवों को बाटकर अपने उद्देश्यों को पूरा करने की कोसिस करते है। 

ये उद्देश्य कुछ भी हो सकता है, चाहे वो कितना भी छोटा या कितना भी बड़ा क्यों ना हो।

लोगो के साथ बात-चित करना, लिखित सन्देश भेजना, अपने हाट या आखो से किसी को इशारे करना ये सभी बिभिन्न प्रकार के संचार के उदहारण होते है।

बहुत सारे समाजशास्त्रीक ये भी कहते है की हम इंसान खुद के साथ भी संचार करते है, जिसको उन्होंने नाम दिआ है 'आंत-संचार' (Intra-Communication), हालांकि इसके बारे में हम इसके प्रकारो के अध्ययन में अच्छे से जानेंगे।      
संचार या कम्युनिकेशन क्या है ?