Sunday, 16 September 2018

Auguste Comte positivism theory in Hindi-Three stages of human development

Auguste Comte positivism theory in Hindi

Auguste Comte positivism theory in Hindi- सामाजिक घटनाये क्यों होती है ,कैसे होती है और किस तरीके से होती है ? ये सारे प्रश्न जिस महान समजतात्विक सिद्धांत के साथ जुड़ा हुआ है उस महान सामाजिक सिद्धांत को हम प्रत्यक्षबाद या positivism बोलते  है।

दार्शनिक Auguste Comte की इसी तत्व ने ही 1839 में समाजतत्वा का स्थापना किआ था दोस्तों क्या आप जानना चाहते है की positivism क्या है और ये किस तरीके से समाज अध्ययन में  ये महत्वपूर्ण भूमिका पालन करता है?


तो आज में आप लोगो को बताऊंगा इस महान सिद्धांत (Auguste Comte positivism theory in Hindi) के बारे में जिसने एक युग का अंत करके समाज अध्ययन के दिशा में एक नया युग का स्थापना किआ है। तो सबसे पहले हम बात करते  Auguste Comte के बारे में जिन्होंने समाजशास्त्र का स्थापना किआ था ...........
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Auguste Comte- कौन थे ?

जब समाजशास्त्र शब्द का उच्चारण होता है तब सबसे पहले जिस व्यक्ति का नाम मन में आता है वो है अगस्त कोम्टे। इन्ही को इस विषय का पिता माना जाता है। sociology- शब्द का सबसे पहला प्रयोग इन्होने ही मानब समाज अध्ययन के लिए किआ था।

19 जनुअरी 1798 को French के Montpelier में इनका जनम हुआ था। इनके जनम के समय यूरोप में नबजागरण का भूकंप चल रहा था। नबजागरण के जरिये हुए क्रांति ने पुरे यूरोप महादेश का समाज और संस्कृति में अभुत्पुर्ब परिवर्तन साधन किआ।

लकिन क्या ये बदलाब अकेले ही आया था ?बिलकुल नहीं ,इसने साथ ही में ले आया था बहुत सारा सामाजिक समस्या। 

उस समय इन समस्याओ को समाधान करने के लिए समाज दार्शनिको ने अनेको उपाय अबलम्बन किआ लकिन ज्यादातर नाकाम हुए क्योकि वो सारे पूर्ण रूप से बैज्ञानिक आधार के ऊपर प्रथिस्तित नहीं थे। इसी कारण कोम्टे के मन में ये प्रत्यक्षबाद का धारना उत्त्पन्न हुआ।

इन्होने इन समस्याओ के ऊपर गंभीर अध्यन किआ, की क्यों कोई समस्या का जनम होता है ,किस तरीके से ये लोगो को प्रवाभित करते है और इसका परिणाम क्या होता है तथा किस तरीके से समस्याओ का समाधान किआ जा सकता है ?


इन अध्ययनों के जरिए ही कोम्टे ने सन 1839 को मानब समाज का बिज्ञान संमत बिचार करने के लिए sociology-शब्द के उपयोग किआ जिसने जन्म दिए समाजशास्त्र का। इसीलिए आज Auguste Comte को इस विषय का पिता माना जाता है। इस महान दार्शनिक ने 5 सितम्बर 1857 को अपनी आखिरी सासे ली।

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प्रत्यक्षबाद या positivism क्या है ?

दुनिआ में हमारे ज्ञात और अज्ञात बहुत सारे घटनाये घटती रहती है। जहा पर हम कुछ घटनाओ के बारे में जानते है और कुछ के बारे में नहीं जानते, लकिन जिन सबके बारे में हम जानते है क्या उसके बारे में पूर्ण रूप से जानते है ?

ज्यादातर लोग नहीं जानते, क्योकि वो लोग युक्ति का प्रयोग ज्यादा नहीं करते। प्रत्यक्षबाद का सिद्धांत यही पर अपना कार्य करते है। युक्ति ,तर्क ,परीक्षा इत्यादि इस सिद्धांत का मूल उपादान है।

मान लीजिए कोई इंसान जब आत्महत्या करता है तब कुछ समाज के लोग बिना कोई समझ के ही यह बोल देते है की उस इंसान के ऊपर कोई दानबी शक्ति का प्रकोप पढ़ गया था ,अर्थात घटना के बारे में जानते है लकिन अचल सत्य बारे में पूर्ण रूप से नहीं जानते।

अगर उस घटना के ऊपर प्रत्यक्षबादी धारणा का प्रयोग किआ जाये तो हमारे सामने बहुत सारा प्रश्न खड़ा हो जाएगा , जैसे की क्यों उस इंसान ने खुदखुशी की ,क्या परिवार में आतंरिक संघात था या फिर किसी ने उनके ऊपर बहुत दिनों से मानसिक  दबाब डालके रखा था ?


ये सारे प्रश्न उस घटना के अचल रहस्य उद्घाटन के लिए बहुत ही जरूरी है। इन सारे प्रश्न के उत्तर के जरिए ही अचल सत्य तक पंहुचा जा सकता है और इन सबके सफल प्रयोग को ही प्रत्यक्षबाद या positivism बोला जाता है। प्रत्यक्षबादी सिद्धांत हमेशा ही युक्ति के ऊपर कार्यो करता है बिना बिचार किआ अतिमानबीओ शक्ति ,अयौक्तिक सोच को ये पूरी तरीके से नकार देता है।
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Auguste Comte- ने यूरोप की समाज प्रणाली के समस्याओ को अध्ययन करके उनका समाधान करने हेतु ही इस युक्तिपूर्ण उपाय का उदभाबन किआ था। अतिभौतिक सोचो के जरिए सामाजिक समस्याए कभीभी समाधान नहीं हो सकती है।

Auguste Comte के प्रत्यक्षबाद या positivism को प्राप्त करने तक मानब समाज के बिकाश का तीन मूल भाग (Three stages of human development)  -

  • सबसे पहला भाग है अतिभौतिक भाग ये भाग मानब सभय्ता के बिकाश का सबसे पहला भाग  है। उस समय पर मानब में कोई भी ज्ञान और बुद्धि नहीं थी। लोग यौक्तिक सोच नहीं कर पाते थे ,उस समय एहि सोचा जाता था की प्रकृति के सभी घटनाये कोई अतिमानबीओ शक्ति करते है। लोग उसका असल कारण जानने का प्रयास नहीं कर पाते थे।
  • आध्यात्मिक स्तर या फिर metaphysics stage-है मानब सभय्ता के बिकाश का दूसरा स्तर। यह स्तर में समाज पहले से ज्यादा उन्नत हुई। लोगो मन में धीरे धीरे सोच का जनम होने लगा। लोग पहले से बेहतर तरीके से प्राकृतिक घटनाओ का बिस्लेशन करने में शक्षम हो पा रहे थे। लकिन पॉजिटिव स्टेज में अभी भी बहुत बाकि थी। इस्वर ,धर्म इत्यादि थे इस समय का मूल चरित्र।
  • सबसे आखिर और तीसरा स्तर है प्रत्यक्षबादी स्तर। समाज के इस स्तर में लोग बहुत ही युक्तिबादी होने लगा। लोगो के मन में पुराने सोचो के ऊपर सवाल खरे होने लगे और साथ ही में उसका उत्तर भी ढूंढ़ने को भी कोसिस करने लगे। प्राकृतिक घटनाये कैसे होते है ,क्यों होते है इन् बातो को लोग अध्ययन करके उसका जबाब निकाल ने में इस स्तर के लोग सक्षम हो गए। धर्म ,ईस्वरीय शक्ति के प्रभाव इस स्तर पर धीरे धीरे इस समय में दुर्बल होने लगे।



Auguste Comte -ने ये सोचा था की अगर ऐसे यौक्तिक सोच प्राकृतिक  बिज्ञान में हो सकते है तो सामाजिक बिज्ञान में क्यों नहीं ?इसी कारण उन्होंने सामाजिक घटनाओ के ऊपर प्रत्यक्षबादी धारणा का प्रयोग किआ।