Friday, 14 September 2018

भारतीय समाज के ऊपर पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव-कुछ अच्छे और कुछ बुरे

भारतीय समाज के ऊपर पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव

भारतीय समाज के ऊपर पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव (Bhartiya samaj ke upor pacchimi sanskriti ka prabhw) - अाज का समय है ग्लोबलाइजेशन का, पूरी दुनिआ आज एक दूसरे से जुड़ चुकी है और इसी कारन से पूरी दुनिआ की संस्कृति भी एक दूसरे के साथ मिलती ही जा रही है। 


बिस्व की संस्कृति का यह मिलाप आज जनम दे रही है उच्च मान की प्रतियोगिता का ; जहाँ हर एक अपने उपादानों को सबसे शक्तिशाली करने की कोसिस में जुड़ा हुआ है। जहा शक्तिशाली संस्कृतिओ ने दुर्बलों के ऊपर आज अपना कब्ज़ा इस कदर जमाआ हुआ है की वो करीब करीब ख़तम ही होने वाला है।

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दोस्तों आज मई आप के साथ बात करने जा रहा हु पश्विमीकरण या westernization की , आज पूरी पृथ्बी जिन सांस्कृतिक उपादानों के अधीन है वो है पश्विमी संस्कृति। 

भारतीय समाज भी आज इस धारणा के उपादानों के गुलाम सा है क्योकि लोग आज कल आधुनिक होने के चक्कर में पश्विमीकरण को ही इसका समार्थक बनाये हुए है। दोस्तों यह सबको मालूम होना चाहिए की अधोनिकीकर और पश्विमीकरण समार्थक नहीं है।

अाधोनिकीकर का मतलब होता है तार्किंक-यौक्तिक,मुक्त  चिंता करना और उसी के मुताबित कार्यो का समापन करना और इसके बिपरीत पश्विमीकरण केबल अमेरिका,यूरोप  जैसे पश्विमी देशो का संस्कृति को समर्थन और उपयोग करने को की समझाता है, चाहे वो यौक्तिक चिंता हो या नहीं। 

उदहारण के रूप में अमेरिका और यूरोप जैसे देश-महादेश के लोग शादी से पहले अबाध यौन मिलन का समर्थन करते हैं लकिन क्या असल में ये यौक्तिक सोच है और क्या इसके कारन सुबिधा ज्यादा होती है या फिर असुबिधा, आप खुद सोचके कमेंट में लिखिएगा।

दोस्तों आज इस लेख में आपको भारतीय समाज के ऊपर पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव  (Bhartiya samaj ke upor pacchimi sanskriti ka prabhw) के कुछ ऐसे अच्छे और बुरे दिशाओ के बारे में बिस्तार से बताऊंगा जो भारतीओ समाज को प्रभाबित करता रहा है। 

और आखिर में यह भी शेयर करूँगा की पश्चिमी संस्कृति बिस्व की समाज प्रणाली में क्यों दिन दिन समां ही जा रहा है।


भारतीय समाज के ऊपर पश्चिमी संस्कृति के अच्छे प्रभाव  (Bhartiya samaj ke upor pacchimi sanskriti ke acche prabhw)

1. यौक्तिक सोच का बिकाश : - आज अधोनीकीकरण पुरे बिस्व में ही हो रहा है। क्या आप जानते है दोस्तों, की आधुनिकीकरण का जनम पुनर्जागरण काल यानि Renaissance के जरिए हुआ था और इसका जो मूल पृष्टपुसक राष्ट्र थे वो थे इटली ,अमेरिका ,इंग्लैंड इत्यादि। 

इन पश्चिमी रास्त्रो के सभी सोच को हम आधुनिक नहीं बोल सकते पर इनके जो जो यौक्तिक चिंता थे वो आधुनिकताबाद का ही देन बोलना पड़ेगा जिन्होंने इंडिया की समाज प्रणाली का बहुत ज्यादा परिवर्तन कर दिआ। 

जैसे की बाल्य विवाह का निषिद्धकरण ,सतिदाह प्रथा का अंत ,बिधवा विवाह का पुनर चलन इत्यादि। 

अगर अधुनिकताबाद के बिस्तार से पश्चिमी रास्त्रो में इन यौक्तिक चिंताओ का जनम नहीं होता और अगर ब्रिटिश यहा नहीं आके इन् सोचो का निर्मूल नहीं करता तो आज भी भारत में अयौक्तिक प्रथाओं का दबदबा कायम रहता।


2. आधुनिक शिक्षा का बिकाश: - बिस्व आज आधुनिक शिक्षा का समर्थन करता है क्यों की ये शिक्षा प्रणाली अधिक यौक्तिक ,प्रणालीबद्ध ,द्रुततर और लाभदायक है। 

यह सब कहते है की यौक्तिक और मुक्त सोच का अर्थ आधुनिकता से जरित होता है और मानब के शिक्षा में यह बहुत ही जरूरी उपादान है , लकिन में पूछता हु की यह सोच का जनम कहाँ हुआ

क्या पश्चिमी रास्त्रो ने इन् सोचो को शिक्षा में अधिक रूप से प्रयोग नहीं क्या ? कहाँ जाये तो भारत के शिक्षा में परिबर्तन आया आधुनिकीकरण से लकिन अचल रूप में कहाँ जाये तो यह परिबर्तन आया पच्छिमीकरण से ही। 

क्योकि उच्च मानदंड की सोच ,उच्चमान का बिज्ञान ये सभी पछ्मी रास्त्रो में जन्मा है। 


3. जाती प्रथा पतन: - भारत में जाती प्रथा एक बहुत ही पुरानी सामाजिक पद्धिति है जहाँ उच्च -निम्न और मध्यम बर्ग में लोगो को बाटा जाता है। 

यहा पर उच्च बर्ग के लोगो को उच्च स्थान मिलता है और निम्न बर्ग के लोगो को निम्न स्थान तथा बहुत सरे अपमानो का सामना करना पढता है; ये जो सारे उच्च -निम्न का बिचार होता है से ही जनम सिद्ध होता है।  

इंसान की खुद की प्रतिभा को जाती प्रथा पूर्ण रूप से नकार देता है। जब भारतीय समाज में पश्चिमी संस्कृति का बिस्तार हुआ तब धीरे धीरे भारतीय समाज से जाती प्रथा का प्रभाव भी कम होने लगा और आज बहुत सारे राज्यों से ये प्रथा करीबन ख़तम ही हो सुका है और जहाँ जहाँ भी है वहा लोग इन सब बातो के ऊपर ध्यान नहीं देते। 

आज भारत में एक निम्न जाती का व्यक्ति भी खुद के प्रतिभा के दम पर बहुत उचा बन सकता है।   


4. लिंग असमानता का पतन: - पहले भारत में लिंग असमानता थी। एक नारी को वो सम्मान नहीं मिल पा रहा था जो उसे मिलना चाहिए।  नारी होने के कारन पुरुष उनको अपने नियंत्रण में रखने की कोसिस करते थे ,समाज पूर्ण रूप से नारी मर्यादा के बिरुद्ध सा खड़ा था। 

लकिन आज वो नियम बदल सुके है ,पश्चिमी शिक्षा के आरम्भ होने से देश में नारी समाज आज शक्तिसाली हो रहे है और अाज कोई भी नारी पुरुष के गुलाम नहीं है, वो उन सभी कार्यो को कर सकते है जो वो करना चाहते है और इसके लिए उन्हें पुरुष की कोई भी इजाज़त की जरूरत नहीं है। 

इसी कारण आज भारतीअ महिलाये पूरी दुनिआ में अपना नाम रोसन कर रही है। पश्चिमी शिक्षा ने भारतीअ महिलाओ के सबलीकरण में बहुत ही बड़ा योगदान दिआ है।



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भारतीय समाज के ऊपर पश्चिमी संस्कृति के बुरे प्रभाव  (Bhartiya samaj ke upor pacchimi sanskriti ke bure prabhw)

1. विवाह से पूर्ब यौन मिलन: - विवाह से पूर्ब यौन मिलन भारतीय संस्कृति के खिलाफ है लकिन अमेरिका और यूरोप में ये कोई बड़ी बात नहीं है। आज इस देश में भी विवाह से पहले एक पुरुष और महिला एक साथ रहना चाहते है जो बाद में जाके बहुत सारे सामाजिक समस्याओ का जनम देता है। 

जैसे कुंवारे अवस्था में ही संतान का जनम होना ,संतान का अनाथ होना ,हत्या करना  इत्यादि इत्यादि। इन सभी को हम पश्चिमी अपसंस्कृति का फल ही बोल सकते है। 

एक तथ्य के मुताबित अमेरिका में स्कूल में पढ़ रहे बच्चो के 100 में से 60 बच्चे अपने छात्र जीबन में यौन संपर्क स्तापन करते है जो की वो केबल 14 से 20 साल तक की ही उम्र के होते है। 


2. ड्रग्स अद्दीशन: - इंडिया में पहले ड्रग्स अद्दीशन जैसा समस्या नहीं होता था जैसे ही ग्लोबलाइजेशन का प्रभाव पुरे बिस्वा में छाने लगा तभी धीरे धीरे यह समस्या भी भारत में दिखाई देने लगा। 

आज भारत के बहुत सारे नौजवान ड्रग्स अद्दीशन जैसे अपराध तथा समस्या से जुड़ गए है। ये सारे अपराध मूलक कार्य पश्चिमी संस्कृति के ही कु-देन है जो भारतीय समाज को दुःख के गराहे में ले जा रहा हैं। 


3.मूल्यबोध की ही हानि: - पृथ्वी में भारतीय सभ्यता को प्राचीन और उच्च माना जाता है। मानबीअ मूल्यबोध की शिक्षा इस देश का अन्यतम चरित्र है लकिन अाज इस देश में वेस्टर्न संस्कृतिओ ने इस कदर अपना कबब्जा जमा लिआ है की इस देश के उच्च मूल्यबोध को ही हानि पहुंच रहा है। पश्चिमी नीतिओ के कारन इस देश के उच्च मूल्यबोध का पतन भी बहुत दुःख दाई है।

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पश्चिमी संस्कृति का पुरे बिस्व मे फेलाव का कारण (pacchimi sanskriti ka pure bisw me felab ka karan)

1.मनुस्य के प्राकृतिक चरित्र के मुताबित कार्य करते है।
2.मनुस्य को सुख प्रदान करता है।
3.संस्कृतिओ का बिस्तार करने वाले रास्त्रो का आर्थिक अवस्था बहुत ही शक्तिसाली है (अमेरिका, ब्रिटैन ,जर्मनी ,इटली )
4.उच्चमान से उनका प्रसार किआ जा रहा है।