Thursday, 27 September 2018

भ्रष्टाचार रोकने के उपाय पर निबंध- कैसे रोका जाये?

भ्रष्टाचार रोकने के उपाय पर निबंध (Bhrastachar Rokne Ke Upai Par Nibandh)

भ्रष्टाचार रोकने के लिए क्या उपाय प्रयोग किआ जाये ? (Bhrastachar Rokne Ke Upai Par Nibandh in Hindi) किस पद्धिति को प्रयोग करके समाज से इसको पूर्ण रूप से निर्मूल किआ जा सकता है ? आज के समय में ये सारे बहुत ही बड़ा प्रश्न है। 

दुनिआ की हर एक सरकार तथा हर एक व्यक्ति जब समाज में नारा लगाता है तबतो भ्रष्टाचारीता का विरोध करते है लकिन जब कभी ऐसा मौका आता है की घुश दिए या लिए बिना अपने स्वार्थ की पूर्ति नहीं हो सकती तब वही लोग खुद इस कु-कर्म में लिपट जाते है। 

Transparency International- की 2017 के एक रिपोर्ट के अनुसार भ्रष्टाचारीता के मामले पुरे दुनिआ की 201 देशो की सुशी में भारत 85 स्तान पर आता है , यहाँ देश के बिहार राज्य सबसे ऊपर के स्तान में आता है।

ये सच्च में बहुत ही दुःखद घटना है। 
भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय पर निबंध, essay on how to stop corruption
SOURCE


भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय पर बहुत सारे लोगो के मन में भी बहुत सारी धारणाये आती है लकिन उन धारणाओं को वास्तब रूप देना बहुत ही ज्यादा कठिन है। 

दोस्तों आज हम उन्ही भ्रष्टाचार रोकने के उपायों के ऊपर बात करेंगे लकिन मुद्दे पर जाने से पहले ये जान लेना भी जरूरी है की ये अचल में है क्या ,जो हम साधारण रूप से समझते है क्या भ्रष्टाचार वही है

चलिए जान लेते है....... 

भ्रष्टाचार क्या है ?

"भ्रष्ट" शब्द का अर्थ है नस्ट, यानि किसी काम ना आना और "अचार" का अर्थ होता है आचरण ,यानि समाज के व्यक्ति कैसा आचरण करते है। जब कोई व्यक्ति समाज के आचरण में कोई नस्ट आचरण का सम्मिलन करवाता है तब वो आचरण समाज के हिट के बिपरीत होता जाता है। समाजशास्त्र की भाषा में उसी को भ्रष्टाचार बोलते है। 

भ्रष्टाचार केबल आर्थिक दिशा में ही नहीं होता ,लोग ज्यादातर ये गलत धारणा पालके चलते है की बेमानी से किसी व्यक्ति के पैसा लेने वाला इंसान ही भ्रष्टाचारी है लकिन ये धारण पूर्ण सत्य नहीं है। 

बिना कारण किसी को मार-पिट करना ,अपशब्द का प्रयोग करना ये सब भी भ्रष्टाचार ही है। आज के समय में आर्थिक भ्रष्टाचारीता ज्यादा बढ़ता जा रहा है और इसी विषय पर हम T.V , Mobile या youttube पर देखते रहते है ,इसी लिए हामारे मन के किसी अज्ञात कोने में एक धारणा बेथ गयी है की गलत तरीके से पैसे लेने वाला इंसान ही भ्रष्टाचारी है। 

हम ये नहीं कहते की ऐसा व्यक्ति भ्रष्टाचारी नहीं है ,बिलकुल है लकिन इस शब्द का मूल अर्थ बहुत ही बड़ा है।

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भ्रष्टाचार कैसे रोका जाये? या इसको रोकने के कुछ उपाय बताए 

1. भ्रष्टाचार एक मानसिक बीमारी है। इसमें मरीज खुदको बहुत चालक समझता है लकिन अचल में होता नहीं जिसके फलस्वरुप वो अपने घर-परिवार को ही बर्बाद कर डालता है। 

इस बीमारी को रोकने का सबसे पहला तरीका है उच्च मान की आधयात्मिक शिक्षा। 

मई पुरे बिस्व की शिक्षा व्यबस्था की बात नहीं कर रहा लकिन अगर भारत ,पाकिस्तान ,बंगलादेश जैसे रास्त्रो की शिक्षा को देखा जाये तो ये साफ साफ दिखाई देता है की यहा ज्यादातर लोगो को ना आधयात्मिक शिक्षा मिल रहा है और ना ही कारिकरी शिक्षा। 

एक गरीब देश को आगे बढ़ने के लिए इन दोनों शिक्षाओं का होना या फिर दोनों में से एक का होना बहुत जरूरी है।


2. हम गणतंत्र का पूर्ण रूप समर्थन करते है। लकिन अगर देखा जाये तो गणतांत्रिक समाज में ही प्रशाशन ज्यादा दुर्नीति के कीचड़ के पडा रहता है। 

इसीलिए गणतांत्रिक नीतिओ का वहन करने वाले एक  राष्ट्र को ज्यादा से ज्यादा  इस अपराधो के खिलाफ कठोर होना जरूरी है। भ्रष्टाचारी व्यक्ति को कठोर से कठोर सजा (हालाकि कानून  के जरिए) देना भी जरूरी है।


3. एक राष्ट्र या समाज बनता है बहुत सारे लोगो के सम्मेलन से। आज समाज में  भ्रष्टाचारीता बढ़ रहा है; क्या इसके लिए हम और हमारा खुदका कार्य जिम्मेदार नहीं है

क्या सिर्फ प्रशासन को ही दोष देना उच्चित है ? कुछ बड़े नैतिकताहीन् अफसर घुस मांगते है और हम देते है ,क्या ये सच नहीं ?

समाज को ठीक करो ,ठीक करो सिर्फ ये slogan-देने से ही देश नहीं बदलेगा, देश हमसे बनता है, हमारा चरित्र ही देश का चरित्र बनके उभरता है अगर हमने खुद को ठीक कर लिआ तो दुर्नीति क्या कोई भी समस्या हम खुद ही सर्कार के मदद के बिना समाधान कर सकते है।


भ्रष्टाचार के प्रकार

दराचल इसको हम मुख्य रूप से दो भागो में बात सकते है। यहाँ एक है आर्थिक और दूसरा है सामाजिक।

1. आर्थिक भ्रस्टाचार: - ये दराचल अर्थ या धन-संपत्ति को केंद्र करके होता है। आर्थिक भ्रस्टाचार में कोई व्यक्ति किसी और व्यक्ति से गलत तरीके का प्रयोग करके धन या संपत्ति के लोभ को पूरा करता है। उदाहरण: - जब कोई उच्च पद में अधिस्ठित अफसर किसी व्यक्ति को नौकरी देने की लालचा प्रदान करके उससे धन की भुगदान लेता है।  

2. सामाजिक भ्रस्टाचार: - इसमें जब कोई व्यक्ति समाज में प्रचलित आचरणों के बिपरीत अपना आचरण करता है तथा उसके दुवारा किआ गया आचरण समाज के नियमो का उलंघन करता है। उसी को सामाजिक भ्रस्टाचार कहा जाता है। जैसे की बिना कारण किसी व्यक्ति को मार-पिट करना इसका एक अन्यतम उदाहरण है।     

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