Tuesday, 11 September 2018

इंडिया की गरीबी के 5 मूल कारण- दुनिआ के अर्थनीतिओ में छोठे स्थान पाने वाले देश में इतनी गरीबी क्यों है ?

इंडिया की गरीबी के 5 मूल कारण

इंडिया की गरीबी के 5 मूल कारण -दोस्तों क्या आपको मालूम है की भारतबर्ष दुनिआ की सबसे बड़ी अर्थनीतिओ में से एक है। 

अगर हम 2017 की बात करे तो इंडिया ने फ्रैंच की अर्थनीति को पीछे चोर कर सातबे स्थान से छटे स्थान का दखल किआ था और अभी कुछ दिनों पहले यह समासार आया है की साल 2018 के अंत तक यह ब्रिटैन की अर्थब्याबस्था को  भी पीछे छोड़ कर दुनिआ की पांचवी सबसे बड़ी अर्थनीति बन जाएगी। 

आज इंडिया की जीडीपी कुल 9.459 ट्रिलियन डॉलर है। इतना प्रगति। .... IMF के मुताबित 2050 तक इस देश की जीडीपी दुनिआ की सबसे बड़ी जीडीपी बन जाएगी। तो फिर दुनिआ के अर्थनीतिओ में छोठे स्थान पाने वाले देश में इतनी गरीबी क्यों है ? क्या आप जानना चाहते हो

तो चलिए दोस्तों आज में आप को बताऊंगा ऐसे मूल कारण जो इंडिया की गरीबी के लिए जिम्मेदार है और देश के लोगों के आगे बढ़ने के रास्ते में रुकावट बनकर खड़े है। 


इंडिया की गरीबी के मूल कारण, causes of poverty in India
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5 ऐसे मूल कारण जो इंडिया के लोगो को गरीबी से ऊपर उठने नहीं दे रहे 

1. उपयुक्त शिक्षा का अभाव : - दोस्तों आप के मुताबित एक राष्ट्र के निर्माण का मूल मंत्र क्या है ? शायद आप लोग कहेंगे की एकता, है मैं भी इस बात का समर्थन करता हूँ लेकिन मेरे मुताबित जो सबसे बड़ा आधार है वो है शिक्षा। 

मैं यहा किसी देश की निंदा नहीं कर रहा लेकिन जरा आप सीरिया जैसे राष्ट्र का समाज अध्यन कीजिए ,वोहा आज क्यों इतना बढ़ा गृह यूद्ध हो रहा है? दोस्तों इंडिया का जो शिक्षा ब्यबस्था है वो समय के अनुरूप नहीं परन्तु एक ही जग़ह पर बहुत समय से कोई धित इंसान की तरह खरा है। 

आज का समय वृतिमूलक शिक्षा का समर्थन करता है लकिन इस देश के ज्यादातर शिक्षा अनुष्ठान वृतिगत शिक्षा के बिपरीत ही अपने कार्यो को कर रहे हैं। यहा पर ज्यादातर व्यक्तिओ को कैसे खुद अपने दक्षता से कमाना है ये नहीं पता क्यों किसी इनको बिशेष विषय के पूरी दक्षता ही नहीं है। 

नया युबा पीढ़ी कभी भी बढ़ा व्यापार, नया आविष्कार की बातो को ध्यान नहीं देते इसके बदले केबल बात करते है तो  सरकारी नौकरी की। व्यवसायी मोनोबृति का आभाव , कारिकारी ज्ञान का होना इत्यादि के कारण लोग खुद कमा नहीं पाते और अंत में जो फल अाता है वो है गरीबी 

भारत के नया युवा पीढ़ी को बिल गेट्स जैसे महान इंसान की उस बात को याद रखना चाहिए जो की उन्होंने कहा था "अगर तुम गरीब बनके जन्मे हो तो यह तुम्हारी गलती नहीं है लकिन अगर तुम गरीब बनके  ही मृत्यु को प्राप्त हो गए तो यह तुम्हारी खुद की गलती है"


2.जनसँख्या बृद्धि : - दोस्तों मेरा सबाल आप से है , मई आपको पूछता हूँ एक देश के लिए जनसंख्या में बृद्धि ज्यादा खतरनाक है या फिर कम होना खतरनाक है

अगर आप भारत,पाकिस्तान और बंगलादेश जैसे देशो से हो तो यह बात आपको अजीब लगेगी परन्तु आज सिंगापुर जैसे देश जनसंख्या बृद्धि के लिए प्रयास कर रहे है, 2015 में आये एक तथ्य के अनुसार फ़िनलैंड की जनसंख्या पहले 100 साल के बाद 600 कम थी। 

उन देशो के लिए जनसंख्या में बृद्धि होना खतरनाक नहीं इसके बदले कम होना ज्यादा खतरनाक है। लकिन अगर हम भारत ,पाकिस्तान,बंगलादेश जैसे देशो की बात करे तो यहा जनसंख्या बृद्धि एक खतरा बनता जा रहा है। 

मैंने आपको ऊपर बताया था की भारत राष्ट्र की जीडीपी दुनिआ की 6 नंबर पर अाता है लकिन देश की जनसंख्या इतनी ज्यादा है की इसकी जब बटवारा किआ जाता है तब केबल अति निम्न भाग ही प्रत्येक व्यक्ति को मिल पाता है। 

उदाहरण के रूप में आप पांच दोस्त हो और आप लोगों के पास पांच अंडे है अगर आप पांचो में वो अंडे बटे तो हर एक को एक एक मिलेगा लकिन यदि वहा पर दोस्त पांच के बदले दस होते तो सभी को एक एक नहीं मिल पाता इसके बिपरीत आधा आधा ही मिलता। इस देश में भी यही हो रहा है उत्पादन के तुलना में खाने बाले अधिक है और इसीलिए आज ये गरीबी का मूल कारण होता जा रहा हे।



3. अवेध प्रवास: -  अगर गरीबी एक फल है तो जनसंख्या बृद्धि उस फल का कारण और अगर जनसंख्या बृद्धि को एक फल के रूप में देखा जाये तो अवेध प्रवास इसका अन्यतम कारण है।

दोस्तों भारतबर्ष में भी बही रास्त्रो से अवेध प्रवास हो रहा है जिसके कारण देश में अति द्रुत गति से जनसंख्या का बिस्तार हो रहा है और इसके कारण दिन दिन देश में गरीबी भी बढ़ रही है।
poverty is a social problem in India, poverty in India
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4. उच्च मनोभाव का अभाव : - दोस्तों, इंसान आप कब अपने इच्छा को पूर्ण करने में पूरा जोर लगा देते हो ? जब आपके मन में कोई भी चीज पाने की एक धड़कती हुई इच्छा का जनम लेता है तब आप अपना पूरा जोर लगाके उस इच्छा को पूर्ण करने की कोसिस करते हो और अगर आपका मन में ही वो एक धड़कती हुई इच्छा का जनम ना हो तो क्या आप पूर्ण समर्पण से उसे प्राप्त करने की कोसिस करोगे। 

चलिए आपको मई आज कल के बच्चो में पाए जाने बाले हसी आने बाला एक उदहारण देता हूँ। आज कल के लड़के जब थोड़ा जबान होने लगते है तब उनको मोटरसाइकिल खरीदके हीरोगिरी दिखाने का बहुत शोख सा हो जाता है इसीलिए वो अपने माता -पिता से बाइक की मांग करते है और जब अभिभाबक उनके मांग को नकार देते है तब इच्छा के तीब्रता के कारण वो खाना पीना छोड़ के भूख हरताल में लग जाते है  और तब तक करते है जब तक की उनको अपने पचंद का बाइक मिल जाये। 

इच्छा की तीब्रता को अगर हम अच्छे कामो में लगाए तो हम कुछ भी कर सकते हैं। इंडिया के नोजवानो के बिच इस गुण का बहुत ज्यादा अभाब देखा गया है। 

इसके कारण नया आबिस्कार ,नया प्रयोग के क्षेत्रो में देश आज भी बहुत पीछे है। इतिहास गवा है जो जो देश नया आबिस्कार और नया प्रयोगो के लिए कोसिस नहीं करते वो देश कभी भी आगे नहीं बढ़ पाए है।


5. भ्रष्टाचारीता: - असमीआ  समाज में एक बहुत ही लोकप्रिय कथा चालित है ,उस कथा के अनुसार "जब समाज का शासक बर्ग ही शोषक बन जाता है तब एक समाज या देश कभी भी आगे नहीं बढ़ पाता है " इंडिया की प्रसाशन वयबस्था में बहुत ही भ्रष्टाचारीता है।

बहुत बड़े बड़े राजनेता ,प्रसाशन के अफ़सर इन कार्यो में जरित होता है (सब की बात नहीं की जा रही है) जिसके कारण लोगो को अपना प्राप्य अधिकार भी नहीं मिल पाता। 

जहा ये देश 2012 से 2014 तक भ्रष्टाचारीता के स्थान पर बिस्व में 94 में था आज वो नंबर कम होकर 85 तक आगया। भारत में दिन दिन बढ़ती भ्रष्टाचारीता लोगो के जीबन प्रोनालिओ को निम्न स्टार पर ले जा रहे है। और इसी कारन से गरीबो की संख्या भी हर दिन बढ़टी ही जा रही है।


आज का सबाल 
क्या आप ने कभी अपने माता -पिता को यह बोला है की आपमें पुरे समाज को बदल देने की क्षमता है

अगर आप खुदको प्रतिभाशाली मानते है तो ऐसी बाते माता -पिता और दोस्तों के सामने बोलने की हिम्मत करो चाहे वो आप पर क्यों हॅसे; यह हमेशा ही याद रखो की आप एक प्रतिभाबन व्यक्ति हो।

जबाब नीचे जरूर लिखिएगा......