Thursday, 20 September 2018

कार्ल मार्क्स के ऐतिहासिक वस्तुबाद हिंदी में (Karl Marx historical materialism in Hindi)

कार्ल मार्क्स के ऐतिहासिक वस्तुबाद क्या है?- हिंदी में 

कार्ल मार्क्स के ऐतिहासिक वस्तुबाद हिंदी में (Karl Marx historical materialism in Hindi)-इतिहास किसके कार्यो के द्वारा निर्धारित होता है

क्या समाज के शक्तिशाली व्यक्ति इसका निर्धारण करते है या फिर राजा-महाराजा? इन्ही प्रश्नो का एक अति महत्वपूर्ण उत्तर दिआ था दुनिआ के महान दार्शनिक कार्ल मार्क्स ने, जिनका जनम हुआ था जर्मनी के टियर शहर में सन 1818 के 5 मई को।
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मार्क्स एक दार्शनिक थे, जिनके ज्यादातर सोच मानब कल्याण के अनुरूप थे  जिसके कारण आज भी उनको समाजशास्त्रोबिदो के सुषि में सबसे ऊपर रखा जाता है। 

कार्ल मार्क्स के अनुसार इतिहास किसी महान व्यक्तिओ के कार्य और इच्छा निर्धारित नहीं करते और ना कर सकते है, क्यों की इसका निर्धारण सामान्य व्यक्तिओ के कार्य और इच्छा से ही होता है 

महान व्यक्ति या फिर राजा-महाराजा उन सामूहिक इच्छाओ का केबल  नतृत्व वहन करते है, पूरी दुनिआ इसी तरीके से चलती रही है और आगे भी चलती रहेंगी।

उदाहरण के रूप में मान लीजिए अमेरिका के स्वतंत्रता यूद्ध में जॉर्ज वाशिंगटन ने नतृत्व लिआ थाऔर उनकी उस महान कार्य के वजह से आज भी उनको उस देश में उच्च स्थान दिआ जाता है।  

लकिन यहि पर एक प्रश्न आता है की अगर अमेरिका के सामान्य लोग ब्रिटिश साम्राज्य के साथ ही रहना चाहता तो क्या आज अमेरिका का इतिहास बदलता या फिर वैसा ही रहता ? क्या वाशिंगटन जैसे महान नेता अकेले ही इतिहास बदल पाते

बिलकुल नहीं , क्यों की जब तक समाज के सामान्य व्यक्ति इतिहास परिवर्तन के लिए तत्पर नहीं होता है तब तक मानब समाज वैसे ही चलता रहता है, जैसे वो पहले था


कार्ल मार्क्स का ऐतिहासिक वस्तुबाद इसी मुद्दे पर कार्य करते है। मार्क्स के अनुसार भौतिक प्रोयोजन ही मानब समाज को एक स्तर से दूसरे स्तर तक ले जा रही है। और आगे भी ले जाती रहेंगी। 

समाज हमेसा ही एक पद्धति के ऊपर नहीं चल सकता। अन्न,वस्त्रो ,और स्थान की जरूरत पूरा करने के लिए इंसान एक पद्धति के ऊपर निर्भरशील होता है लकिन समय बीतते बीतते उस पद्धति की क्रियाशीलता कम होता जाता है और एक समय ऐसा आता है की पूरा पुराण पद्धति ही बदल देना परता है। 

इतिहास परिवर्तन के दिशा में मानब के इस भौतिक निर्भरशीलता को ही दार्शनिक मार्क्स ने ऐतिहासिक वस्तुबाद नाम से नामांगकृत किआ है।

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कार्ल मार्क्स के ऐतिहासिक बस्तुबाद के जरिए मानब समाज परिवर्तन का छ भाग हिंदी में 

भौतिक वस्तुबाद के ऊपर निर्भर होके मानब समाज आज इस स्तर तक पहुचा है ,इसका व्याख्या करते हुए मार्क्स ने समाज विकाश को भाग में बाटा है और वो है आदिम ,दासत्व ,जमीदारी ,पूजिबादी  ,समाजबादी और साम्यबादी स्तर।
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कार्ल मार्क्स कहते है की समाज जब आदिम स्तर पर था तब लोगो को कोई भी श्रेणी शंघर्ष का सामना नहीं करना परता था। 

उस समय जनसंख्या बहुत ही कम थाइसीलिए लोगो को अपने नित्य प्रोयोजनो को पूरा करने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी परती थी। लकिन समय बीतते बीतते जनसंख्या बढ़ने लगे और समाज में लोगो के प्रयोजनों को पूरा करने के लिए भी द्वन्द आरम्भ होने लगे। 

इस समय पर जो लोग शारीरिक रूप से ज्यादा शक्तिशाली थे वो लोग दुर्बल लोगो को अपने दास बनाके रखने लगे ,इस स्तर को दार्शनिक मार्क्स दासत्व का स्तर बोलते है।

जब समाज में और भी जनसंख्या बढ़ने लगे तब व्यक्तिओ का जो नित्य प्रोयोजन थे उसको पूर्ण करने के लिए और भी ज्यादा प्रतियोगिता होने लगे। दासत्व के स्तर में जो लोग दुर्बलों को दास बनाके रखते थे इस स्तर में वो लोग जमींदार बनने लगे और दासो को अपने जमीन पर कार्य करवाने लगे। 

Marxism- के अनुसार इसी को जमींदारी प्रथा का प्रारम्भ माना जाता है। जमींदार धीरे धीरे बहुत सारे सम्पत्तिओंका अधिकारी होने लगे जो बाद में जाके पूजिबादी व्ह्याबस्था का निर्माण करते में जिम्मेदार रहे। 

पूजिबादी समाज में बहुत ही ज्यादा श्रेणी शंघर्ष होता है ,जहा पर श्रमिको को बहुत शोषण किआ जाता है। इसके कारण एक समय ऐसा अाता है की बिस्व के पूरी श्रमिक श्रेणी एक होके पूजिबाद का पूरा बिनाश कर डालता है और क्षमता खुद के हाथ में रखकर समाजबाद का प्रतिष्ठा करता है और बाद में जाके यही समाजबाद साम्यबाद का जनम देता है। 

साम्यबादी अवस्था में कोई भी श्रेणी शंघर्ष नहीं रहता। यहा सब लोग समान होते है और बिना कोई भेदभाब से जीता है। मार्क्स के मतानुसार प्रत्येक मानब समाज का परम लक्ष साम्यबाद ही है।

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