Saturday, 29 September 2018

मानब समाज में भ्रष्टाचार के प्रभाव (Manav samaj me bhrashtachar ke prabhav)

मानब समाज में भ्रष्टाचार के प्रभाव क्यों परता है ?

मानब समाज में भ्रष्टाचार के प्रभाव (Manab samaj me bhrashtachar ke prabhav) हो या फिर अन्य कोई सामाजिक परिघटना ,जब समाज में कोई क्रिया होती है तब उसके बिपरीत प्रतिक्रियाए भी होती है। 

मान लीजिए किसी व्यक्ति ने किसी अफसर को रिस्वत देकर कोई नौकरी ली ,अब उस नौकरी लेने वाले व्यक्ति के मन में एक धारणा बेथ जाएगा (सबके नहीं लकिन ज्यादातर लोगो में ये क्रियाशील है ) की उसने नौकरी लेने के लिए जिस तरीके का इस्तेमाल किआ था और जितना धन गवाया उन सारे धनो को वो उसी तरीके से उसूल भी करेगा। 

अब उसूल करने के कोसिस में वो अन्य लोगो को भी उस गंदगी में लाएगा ,धीरे धीरे वो धारणा पुरे समाज में छा जायेगा।

मानब समाज में भ्रष्टाचार के प्रभाव
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मानब समाज में भ्रष्टाचारीता का बिकाश क्यों होता है?

क्या आपको पैसा प्यारा है ,क्या आप एक आरामदायक जीबन जीना चाहते है

अगर आपका जबाब हाँ है तो आप दुनिआ के 98 प्रतिशत लोगो में से एक हो और अगर ना तो आप उस बाकि 2 प्रतिशत लोगो में से एक हो। दुनिआ में उस 98 प्रतिशत लोगो के ज्यादातर लोगो को बहुत ही जल्दी बहुत ज्यादा धन-दौलत चाहिए ;ताकि वो और उनके बच्चे एक आरामदायक जीबन जी सके, महँगी-महँगी गारिआ खरीद सके और समाज में खुद का रुतवा कायम कर सके। 

हलाकि ये गलत भी नहीं है लकिन जब कुछ लोगो के मन में इसको प्राप्त करने के इच्छा तीब्र से तीब्रतर होता जाता है और समाज के नियम अनुसार चलके उनसबको प्राप्त नहीं कर पाते है  तभी ये लोग भ्रष्टाचारीता का आश्रय लेते है।

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भ्रष्टाचारीता के जरिए भ्रष्टाचारी इंसान को बहुत सुख प्राप्त होता है क्योकि उसके कार्यो के द्वारा उसका अपना लक्ष साधन होता है। 

आज पूरा बिस्व पूजिबाद की और आगे बढ़ रहा है। पूजिबाद में तो द्रुत आर्थिक प्रगति सम्भब हो रहा है लकिन लोगो के बिच पहले से ही जो आंतरिकता का संबंध चलता रहा था वो आज ख़तम होने के कागार पर है। 

क्योकि पूजिबादी समाज की मूल चरित्र ही है उद्पादन ,बितरण और उपभोग। एक समाज में जब लोगो की मानसिकता आंतरिकता से हटकर केबल भोग की ओर प्रस्थान करता है तब लोग केबल अर्थ प्राप्ति की ही ओर दौरता है। 

समाज और कानून में चलते रहे बाधा जब उनके रास्ते पर रुकावट बनके खड़े रहते है तथा जब वो सही तरीके से धन की लालचा की पूर्ण  कर नहीं पाते तभी इस असामाजिक आचरणो का आश्रय लेते है।

मानब समाज में भ्रष्टाचार के प्रभाव

सामजिक समस्या का हमेसा ही समाज में बुरा प्रभाव परता है। भ्रष्टाचार के भी बहुत बुरे प्रभाव है जो बाद में जनम देते है और भी ज्यादा समस्याओका। तो इसके कुछ प्रभाव इस तरीके के है :-

1 . सबसे पहले तो भ्रष्टाचारी इंसान के खुद का घर ही बर्बादी के कगार पर खड़ा हो जाता है। निम्न मान के चरित्र के कारण वो बार बार गलत काम करके सोचता है की उसने बहुत सारा धन-सम्पद जूता लिआ लकिन क्या वो इंसान अपने बच्चो को सही शिक्षा देने में सक्षम हो पाया

बिलकुल नहीं ,जिसका खुद का ही चरित्र अच्छा नहीं होता वो दुसरो को अच्छे शिक्षा देने में कभी भी सक्षम नहीं हो पाता। भ्रष्टाचारी इंसान तो दिन दिन अपना चरित्र खोता जाता है और दूसरी ओर अत्यधिक धन सम्पद पाके उसके बच्चे भी अपना चरित्र खोने लगते है।

क्योकि उसकी भ्रष्टाचारी माता-पिता ने उसको कभी ये सीखा नहीं पाता की धन का सदव्यबहार कैसे और कहाँ क्या जाये। भ्रस्टाचारी इंसान तो समाज का अपकार करता है लकिन उससे भी पहले अपकार करता है खुद अपने का ही।


2. अगर घुस देने से ही सबको सब प्राप्त हो जाये तो प्रतिभाशाली व्यक्तिओ के प्रतिभा का कदर कहाँ रह जाएगा। एक योग्य व्यक्ति के अधिकार को एक भ्रष्टाचारी व्यबस्था ख़तम कर डालने की कोसिस करता है।  (हलाकि अगर आप सच्च में एक शक्तिशाली प्रतिभाधर व्यक्ति हो तो ये आपको  ख़तम करने की बिपरीत और भी धैर्यशील और शक्तिशाली बनने में ही मदद करेगा, क्योकि ऐसे व्यक्ति समस्या के अंदर छुपा रहने वाला सुयोग को देख पता है )


3. समाज में गरीबी का विस्तार होता है और गरीबी से चोरी ,डेकोईटी ,बेरोजगारी ,हत्या इत्यादि समस्या उद्धव होता है।


4. देश के प्रशाशन व्यबस्था को भ्रष्टाचार अंदर से खोकला कर देता है इसके कारन देश अंदरूनी भाग से कमजोर होता जाता है। एक देश की कमजोरी उस देश में रहने वाले लोगो के लिए बहुत ही बड़ा खतरा है।


 समाज क्यों भ्रष्टाचार और इसके प्रभाव का विरोध करता है ?

इसका सबसे सुन्दर उत्तर छिपा है प्रसिद्द राजनैतिक दार्शनिक रूसू की लेख में। ऊपर से देखने में ये अति सामान्य सा लगता है लकिन है नहीं। 

साधारण भाषा में कहैं तो ये है की; मानब समाज का गठन ही हुआ था लोगों के सामूहिक एक जैसे समस्याओ को समाधान करने के लिए और सुख प्रबृति को संतुस्ट रखने के लिए। 

अगर भ्रष्टाचार और इसके दुवारा श्रिस्ति हुए समस्याओ से लोगो की सामूहिक सुख को ही आघात पॅहुचता है तो फिर उसको समर्थन करने का  कोई भी प्रश्न खड़ा नहीं होता। 

भ्रष्टाचार के जरिए समाज के लोगो की सामूहिक सुख को आघात पॅहुचने के कारण समाज ने ही कानून के जरिए यह व्यबस्था बना लिआ है की ये समाज के सुख के प्रति आघटदायक है और इसका निर्मूल होना भी बहुत जरूरी है। इसीलिए हम जानते है की कोई भी भ्रष्टाचारी कार्य खुल्ले में नहीं हो सकती।