Saturday, 22 September 2018

भारत की सामाजिक समस्याएं (social problems in India)

भारत की सामाजिक समस्याएं (social problems in India)

भारत की सामाजिक समस्याएं (social problems in India)- बिस्व की प्रत्येक समाज का ये चरित्र है की वो कभी भी समस्या से मुक्त नहीं हो सकता। चाहे जितना भी कोसिस कर ले पर एक समस्या का जब अंत होता है तब दूसरे समस्या का उदय भी होता है। 

दोस्तों आज में आपको बताने जा रहा हूँ भारत देश की कुछ ऐसे सामाजिक समस्याओ के बारे में जो इस देश को आगे बढ़ने नहीं दे रही है।

ये देश आज बिस्व की पाछबी सबसे बड़ी अर्थव्यबस्था  बनने जा रही है ,लकिन इतना ज्यादा आगे बढ़ने पर भी ऐसा लगता है की भारत आगे नहीं बढ़ रहा। तो चलिए दोस्तों सुरु करते है , आशा करता हूँ की आपको ये लेख पछन्द आएगा।

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भारत की 5 अति महत्वपूर्ण सामाजिक समस्याए (5 most important social problems in India)

शिक्षा का आभाव (Lake of Education) -  शिक्षा मानब जीबन के अति तात्पर्यपूर्ण अंश है। इसके बिना आज तक कोई भी व्ह्यक्ति कभी भी प्रकृत मानब नहीं बन पाया है। 

देखा गया है, हमारे समाज में स्कूल या कॉलेज जाने वाले व्ह्यक्ति को ही शिक्षित मान लिआ जाता है ,लकिन हमें खुदको ये पूछना भी जरूरी है की क्या हमारे ज्ञान सुद्ध रूप से बढ़ रहे है या फिर नहीं

भारत में आज करीबन 30 प्रतिशत लोगो के पास अनुष्ठानिक शिक्षा नहीं है और जिन 70 प्रतिशत के पास हे उनमे से भी 50 प्रतिशत के पास स्कूल और कॉलेज की प्रमाणपत्र के अलावा कुछ भी ज्ञान नहीं है।  

केबल प्रमाणपत्र और डिग्री मिलने को ही हम शिक्षा की पूर्ति नहीं बोल सकते ,इसी कारण आज देश के ज्यादातर नोजवानो को बेरोजगार ही रहना पर रहा है जो देश में अपराध की मात्रा बढ़ाने के लिए अन्यतम एक जिम्मेदार है।

देश में शिक्षा प्रणाली के दुरावस्था होने का कुछ अति महत्वपूर्ण कारण -

1 . अतिमात्रा में जनसंख्या बृद्धि।
2.  दुर्बल शिक्षा निति।
3.  ज्ञान लाभ के वजाए केबल प्रमाणपत्र लाभ के प्रति आकर्षित होना।
4.  उच्च प्रशिक्षित शिक्षको का होना या फिर कम परिमाण में होना।
5.  छात्रों -छात्राओं का ये मानना की पढाई केबल कर्रिएर बनाबे के लिए ही है ;ज्ञान प्राप्ति के लिए नहीं।


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यौन अपराध (sexual harassment)  - भारतबर्ष में आज जो सबसे बड़ी सामाजिक समस्या (social problems in India) है वो है यौन शोषण। देश में दिन दिन महिलाओ के ऊपर यौन शोषण की घटनाये बढ़ती ही जा रही है। 

2010 में की गयी एक अनुसंधान के मुताबित 2004 में 18233 बलात्कार की घटनाये घटी और ये परिमाण 2010 में जाकर हुई 22172, इन घटनाओ से नारी के मान- मर्यादा के साथ देश के मान -मर्यादा को भी काफी हानि पहुँच रही है। 

यौन अपराध ज्यादा बढ़ने के मूल कारन कुछ इस तरह के है -

1 . अति उच्च मात्रा में अश्लीन फिल्म देखना।
2 . आधयात्मिक शिक्षा का दुर्बल होते जाना।
3.  पुरुष के तुलना में नारी को समाज में निम्न स्थान प्रदान करना।

ये अति दुखदायी है की उत्तत भारत के कुछ कुछ जगहों पर बलात्कारी पुरुष को केबल चप्पल से दो-तीन बार पिटके ही सजा दिआ जाता है ;और जो महिला उस पुरुष के द्वारा पीड़ीत होती है उसको वो समाज त्याग करती है। 

जिस समय आज महिला बिस्व को जितने के लिए आगे बढ़ रही है उस समय इस देश में ऐसा लिंग असमानता बहुत ही दुखदायी है।

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गरीबी (poverty) - भला कौन ऐसा इंसान होगा जो गरीबी में जीना चाहेगा ? कोई नहीं। आज भारत पूरी दुनिआ की अर्थव्यबस्था का नतृत्व वहन करने जा रहा है तथा बर्तमान बिस्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थनीति है लकिन इतना सबकुछ होने के बावजूद भी आज ये देश दुनिआ की गरीबी के मामले में 26 बे नंबर पर आते है। 

2014 में वर्ल्ड बैंक द्वारा दिखाए गए एक रिपोर्ट के अनुसार देश के प्रत्येक नागरिक प्रतिदिन केबल 3.10 डॉलर में अपना गुजारा करते है।

भारत की गरीबी के मूल कारण

  • अतिमात्रा में जनसंख्या बृद्धि। आज देश की जनसंख्या 130 करोड़ से भी ज्यादा हो सुका है। भले ही एक देश की अर्थव्यवस्था जितना भी आगे क्यों बढ़े पर जब तक वहा जनसंख्या नियंत्रण नहीं होगा तब तक वोहा लोगो का जीबन उन्नत नहीं होगा। 2017 में भारत की अर्थनीति 9.420 ट्रिलियन डॉलर की थी और वो 2018 अंत तक जाकर 10.385 ट्रिलियन डॉलर होने वाली है। लकिन जनसंख्या ज्यादा होने के कारण आय का बितरण सबमे उच्च मात्रा में नहीं हो पाती। और इसी कारण परिणाम में कुछ लोगो को मिलती है निम्न जीबन यापन और कुछ को मिलती है गरीबी। 

  • सोवियत संघ राष्ट्र के पतन के बाद पुरे दुनिआ में पूजिबाद आग की तरह फैल गयी। इंडिया में भी आज पूजिबाद का शासन चल रहा है। अगर देश की जीडीपी की बात करें तो साल 2017 को पूरी जीडीपी के 40 प्रतिशत देश के अमीर पुजीपतिओ के पास थी ,और ये परिमाण 2018 को 45 प्रतिशत तक हो सकती है। आर्थिक क्षेत्र में ये सभी असमानताए भी भारतबर्ष की गरीबी का अन्यतम कारन है। 

  • भारत  की गरीबी का अन्य एक जो मुख्य कारन है वो है करिकारी शिक्षा का होना। नोजवान लोग पढाई ख़तम करने के बाद सरकार नौकरी देगी इसी आशा में बैठे रहते है क्यों की उनको खुद काम करके पैसा कामना नहीं आता। देश के जाने माने मोटिवेशनल स्पीकर उज्वल पाटनी ने इसी कारन एक वीडियो में टिप्पणी की थी की "आज हमारा देश भारत केबल कलर्को का देश बनता रह गया है " ;जब तक नया प्रजन्म नया अबिस्कार की बात नहीं सोचेंगे, सरकारी नौकरी की मानसिकता छोड़के कुछ नया कर दिखाने की मानसिकता नहीं बनाएंगे तब तक भारत से गरीबी नहीं मिट सकती। 




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लिंग असमानता (Gender Inequality) - "नारी केबल चूला जलाने और बच्चो का जनम तथा प्रतिपालन करने के लिए होती है "- कुछ इस तरीके की  सोच थे भारत जैसे देश में कुछ दशको पहले तक। 

नारी और पुरुष को समान नहीं माना जाता था ,हमेसा ही महिलाओ को पुरुष के तुलना में तुच्छ ज्ञान किआ जाता था। आज हलाकि वो धारणा कुछ हद तक बदल चुकी है लकिन अभीभी पूर्ण रूप से ख़तम नहीं हुई है। 

कुछ ऐसे भी माता-पिता होते है जो अपने बच्चो के बिच ही लड़का और लड़की होने के कारण फर्क करते हैं। भारत में कुछ ऐसे भी जगह आज मौजूद है जहा लड़कीओ को स्कूल जाने,खलने ,नौकरी करने ,ब्यापार करने का अधिकार नहीं दिआ जाता। 

उनको हमेसा ही यह बताया तथा समाज के दुबारा मनमे दाल दिआ जाता है की उसने केबल जनम ली है संतान जनम देने के लिए और अपने पति की सेवा करने के लिए, इसके अलावा पृथिबी में उसके लिए और कोई भी लक्ष नहीं है।


आज पूरा दुनिआ आधुनिक है ; आधुनिक दुनिआ में पुरुष और नारी पूर्ण रूप से समान है कोई भी भेदभाब नहीं। आज इस देश की बेतिया जैसे हिमा दास ,इंदिरा नूई पुरे बिस्व में छा सुकि है। तो फिर महिलाओ का इतना साहस और क्षमता देखकर भी इस देश में ये असमानता क्यों ?

भारत में लिंग असमानताओं का अत्यंत महत्वपूर्ण कारण -

  • भारत के प्रासीन कुछ ग्रन्थ जैसे "मनुसंहिता" का प्रभाव इसके समाज में गभीरता तक छाया हुआ है। इस ग्रन्थ में नारीओ को भिभिन्न रूप से समालोचना किआ गया है। ये ग्रन्थ अति प्राचीन काल से मुनिओ और पंडितो के द्वारा समर्थन किआ जाता रहा था, जिसके कारण ग्रन्थ का सिद्धांत भारतीअ समाज में गंभीरता तक घुस गया है और जिसके कारन आज भी इस देश की नारिआ निर्जातीत -अपमानित होती रही है।

  • उच्च मान की सोचने के लिए उच्च मान के सोच का बीज भी पहले से होने आवश्यक है। गुणगट शिक्षा की अभाव के कारन आज भी लोग ये समझ नहीं पा रहे की शारीरिक शक्ति ही सब कुछ नहीं होते ,मानसिक शक्ति को भी ध्यान में रखना परता है। प्राकृतिक दिशा से पुरुष नारी के मुकाबले थोड़े शक्तिशाली होते है लकिन मानसिक रूप से दोनों समान ही होते है। नारी की शारीरिक दिशा को ध्यान में रखके उनको निचे दबा कर रखना भी भारत के लिंग असमानताओं का अन्यतम कारन है।



जनसंख्या बृद्धि (Population Growth) - क्या आप जानते है की भारत बिस्व की population- का 18 प्रतिशत वहन करते है

2016 के रिपोर्ट के अनुसार इस देश की जनसंख्या थी 132.42 करोड़ और चीन की थी 137.87 करोड़। भारत में आर्थिक उन्नयन की तुलना में जनसंख्या की बृद्धि बहुत ही अधिक है ,इसके ही कारण देश में आज गरीबी कम नहीं हो रही। 

आज भारत में हो रहे बिभिन्ना सामाजिक समस्याओ के लिए जनसंख्या बृद्धि भी एक बहुत बड़ा जिम्मेदार है।



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