Thursday, 3 January 2019

सामाजिक सर्वेक्षण के अर्थ, उद्देश्य, विशेषता

सामाजिक सर्वेक्षण के अर्थ


सामाजिक सर्वेक्षण एक पद्धति है जिसके दुवारा किसी विशेष सामाजिक घटना या समस्या के ऊपर वास्तब तत्य संग्रह किआ जाता है। दराचल इसको किसी सामाजिक समस्या के बारे में अध्ययन करने के लिए व्यबहार नहीं किआ जाता बल्कि उस समस्या या घटना को अध्ययन करने लिए के जो जो तथ्य की जरूरत होती है उसकी संग्रह के लिए इसको व्यबहार किआ जाता है।

दोस्तों क्या आपको मालूम है की इसकी जो अंग्रेजी शब्द है 'Survey' वो दो अलग अलग शब्द के मेल से बना हुआ है। इसका एक है 'Sur' और दूसरा है 'Vey'. sur का अर्थ है किसी विषय के ऊपर या 'Over' और 'Vey' का अर्थ है प्रणालीबद्ध तरीके से देखना या सर्वेक्षण करना। अर्थात किसी सामाजिक विषय के ऊपर प्रणालीबद्ध तरीके से देखकर उसके ऊपर तथ्य संग्रह करने को ही 'सामाजिक सर्वेक्षण' बोला जाता है।

सामाजिक सर्वेक्षण के अर्थ, उद्देश्य और विशेषता

सामाजिक सर्वेक्षण के उद्देश्य

1. इसके दुवारा किसी विशेष सामाजिक परिघटना, समस्या इत्यादि के ऊपर वास्तव तथ्य संग्रह किआ जाता है। इन वास्तव तथ्य को बाद में सामाजिक अध्ययन में व्यबहार किआ जाता है। जैसे की: - जनसंख्या बृद्धि के ऊपर सर्वेक्षण के जरिए तथ्य संग्रह और उसके बाद इसके ऊपर अध्ययन।

2. सामाजिक सर्वेक्षण का उद्देश्य हमेशा ही कल्याणकारी और वास्तववादी होता है। इसके जरिए किसी सामाजिक समस्या को प्रतिरोध करने के प्रति पहला कदम रखा जाता है।

3. मान लीजिए किसी समाज दार्शनिक या विज्ञानी ने बहुत पहले किसी सामाजिक सिद्धांत को प्रतिष्ठित किआ था। अगर उसी सिद्धांत को वर्तमान परिस्थिति के ऊपर निर्भर करके पुनः अध्ययन करना है तो उसके लिए सामाजिक सर्वेक्षण बहुत ही जरूरी हो जाता है। किसी समाजतात्विक सिद्धांत की सत्यता को प्रमाणित करने की उद्देश्य से भी सामाजिक सर्वेक्षण चलाया जाता है। 

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सामाजिक सर्वेक्षण की विशेषता

1. सबसे पहले तो ये पूर्ण रूप से तथ्य केंड्रिक है। किसी सामाजिक घटना या समस्या के ऊपर तथ्य संग्रह ही इसका प्रथम कार्य होता है।

2. सामाजिक सर्वेक्षण सामाजिक अध्ययन का प्रथम स्तर है। क्योकि इसके जरिए जो जो तथ्य संग्रह किआ जाता है उन सभी को बाद में अध्ययन के लिए व्यबहार किआ जाता है। 

3. सामाजिक सर्वेक्षण में सर्वेक्षणकारी को समस्या के साथ अपना खुद का संपर्क स्थापन करने पड़ता है। इसके अलावा ये संभव नहीं हो सकता।

4. ये हमेशा ही किसी विषय के ऊपर प्रतिष्ठित होता है। जैसे की : - दरिद्रता, जनसंख्या बृद्धि इत्यादि इत्यादि।


प्रकार (Prakar)    

1.जनगणना और नमूना संग्रह: - जनगणना पद्धिति के जरिए किसी विशेष जनसमूह के ऊपर तथ्य संग्रह किआ जाता है। जैसे की हर 10 साल के अंतर में भारत देश में होने वाले जनगणना इसका एक अन्यतम उदाहरण है।  लकिन जनगणना और नमूना संग्रह दोनों एक ही प्रक्रिया नहीं है। दराचल जनगणना में किसी जनसमूह के हर एक व्यक्ति को तथ्य के रूप में संग्रह किआ जाता है लकिन नमूना संग्रह में उस जनसमूह के कुछ व्यक्तिओ को ही तथ्य के रूप में लिआ जाता है।

अर्थात जनगणना एक ब्रिस्टिट सामाजिक सर्वेक्षण लकिन वही दूसरी और नमूना संग्रह एक सीमित पद्धिति है। लकिन इसकी गुणवत्ता को ध्यान में रखे तो जनगणना के मुकाबले नमूना संग्रह एक उच्च मान का सामाजिक सर्वेक्षण पद्धिति है। 

2. नियमित और अनौपचारिक पद्धिति: - कुछ सर्वेक्षण ऐसे होते है, जिसको किसी निर्धारित समय के बिराम में किआ जाता है, ऐसे पद्धिति को नियमित पद्धिति कहाँ जाता है। उदाहरण के रूप में भारतबर्ष में हर 10 साल के बिराम में किआ गया जनगणना। लकिन वही दूसरी ओर जो ये अनौपचारिक पद्धिति का सर्वेक्षण पद्धिति होता है इसको किसी एक विशेष कारणबर्ष एक या दो बार किआ जाता है। 

साधारण अर्थ में कहे तो नियमित सर्वेक्षण पद्धिति दीर्घ समय तक चलता है लकिन अनौपचारिक पद्धिति दीर्घ समय तक नहीं चलता।  

3. मुख्य और माध्यमिक पद्धिति: - मुख्य सर्वेक्षण वो होता है जिसमे सर्वेक्षणकारी सर्वेक्षण करने से पहले ही उस विशेष जनसमूह के ऊपर एक संकल्पना प्रस्तुत करने के लिए करता है। लकिन वही दूसरी ओर माध्यमिक पद्धिति वो होता है जसिको मुख्य पद्धति के प्रयोग करने के बाद ही किआ जाता है। 

4. सरकारी और व्यक्तिगत: - सरकारी अनुष्ठान, संस्था तथा किसी सरकारी बिभाग के दुवारा किआ गया किसी भी सर्वेक्षण को सरकारी सर्वेक्षण बोला जाता है। लकिन व्यक्तिगत पद्धिति में कोई व्यक्ति व्यक्तिगत कार्य की अध्ययन तथा पूर्ति के लिए ही करता है। 

सरकारी : - देश की जनगणना, गरीबी की जनगणना इत्यादि। 
व्यक्तिगत : - अगर किसी कंपनी का मालिक अपने श्रमिकों को केंद्र करके कोई सर्वेक्षण करता है तो वो व्यक्तिगत पद्धिति के अंतर्गत हो जायेगा।