Sunday, 14 April 2019

भारतीय संबिधान और सामाजिक समता


भारतीय संबिधान और सामाजिक समता


आप एहि जानना चाहते हो ना की भारतीय संबिधान किस तरह इस देश में सामाजिक समता प्रतिष्ठा करने के ऊपर अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। तो चलिए आज हम इसी विषय के ऊपर चर्चा करते है।

सबसे पहले आपको बता देना चाहता हु की भारतीय संबिधान में स्थित मौलिक अधिकारे ही इस विषय का मूल केंद्र है।

क्योकि इन्ही मौलिक अधिकारों के जरिए यहाँ हर एक जाति, धर्म, वर्ण, भाषा, सामाजिक श्रेणी, लिंग के लोगो को एक समान समाजिक स्थान प्राप्त हो रहा है।

अब आईए इसको विस्तार से जानने की प्रयास करते है : -
भारतीय संबिधान और सामाजिक समता

1. समानता का अधिकार के जरिए : - भारतीय संबिधान की 14 नंबर अनुच्छेद से 18 नंबर अनुच्छेद तक समानता की अधिकार के बारे में व्याख्या किआ गया है।

14 नंबर अनुच्छेद में उल्लेख है की भारत के प्रत्येक नागरिक को एक समान क़ानूनी अधिकार प्रदान किआ गया है।

चाहे वो किसी भी जाति, धर्म, वर्ण, भाषा, और इलाके से क्यों ना जुड़े हुए हो, लेकिन कोई भी इसको अस्वीकार नहीं कर सकता।

16 नंबर अनुच्छेद के जरिए प्रत्येक भारतीय नागरिक को एक समान सरकारी नौकरी करने का अधिकार प्रदान किआ गया है और उसी तरह 17 और 18 नंबर अनुच्छेद के जरिए अस्पृश्यता को वर्जन और शिक्षा की समान अधिकार के बारे में उल्लेख किआ गया है।

अगर कोई व्यक्ति इन नियमो को मानने से अस्वीकार करता है या इसके खिलाफ कोई कार्य करता है तो उसको भारत के ही कानून व्यबस्था कड़ी से कड़ी दंड प्रदान करेगा।

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2. स्वतंत्रता की अधिकार के जरिए : -   भारतीय समाज में प्रत्येक नागरिक एक समान है इसका पता चलता है भारतीय संबिधान में स्थित और एक अन्य अधिकार - स्वतंत्रता की अधिकार के जरिए।

इसके बारे में अनुच्छेद 19 से 22 तक उल्लेख किआ गया है।

जैसे की अगर किसी व्यक्ति ने कोई जुर्म नहीं किआ है तो उसको कभीभी दंड नहीं प्रदान किआ जा सकता, चाहे वो किसी भी जाति-धर्म का क्यों ना हो, और दूसरी ओर प्रत्येक व्यक्ति का अपना अपना व्यक्तिगत जीबन यापन करने का अधिकार है जिसपर कोई भी हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

अगर आप संबिधान की इस अधिकार को अच्छे से विश्लेषण करोगे तो आपको पता चलेगा की इस पुरे विषय का एक ही अर्थ है और वो है की "आप अपने स्वतंत्रता को तब तक भोग कर सकते हो जब तक आपकी स्वतंत्रता किसी अन्य की स्वतंत्रता हानि ना करे".


3. धर्म आचरण की समानता के जरिए : - इस देश में प्रत्येक धर्म के लोग सुरक्षित रहे और एक समान एक सुखी जीवन यापन करे इसके लिए भारतीय संबिधान ने इस देश को एक धर्म निरपेक्ष देश की मर्यादा प्रदान किआ है।

इसका उल्लेख 25, 26, 27 और 28 अनुच्छेद में किआ गया है।


4. शोषण को रोकने के जरिए : - 23 और 24 अनुच्छेद के जरिए शोषण रोकने का प्रयास किआ गया है। इसमें बाल मजदूरी के विरुद्ध कठोर पदक्षेप, और निम्न जाति के लोगो की सामाजिक मर्यादा को रोकने की कोसिस किआ गया है।


5. शिक्षा और सांस्कृतिक समता की अधिकार के जरिए : - भारत एक भिन्न संस्कृति का देश है, जहाँ हज़ारो लाखो की तादाद में बिभिन्न सांस्कृतिक उपादान बचते है।

इन सांस्कृतिक उपादानों में से कुछ है अत्यंत धनी और कुछ नहीं। लेकिन जो भी हर एक संस्कृति का अपना अपना विशेष महत्त्व होता है जिसको कोई भी अपमान नहीं कर सकता।

इसीलिए भारतीय संबिधान ने 29 और 30 नंबर अनुच्छेद के जरिए शिक्षा और सांस्कृतिक समता की अधिकार को रक्षा करने की कोसिस की है।


6. संबिधानिक प्रतिकार का अधिकार : - भारत के सरकार अगर कभी ऐसा कोई कार्य करता है जो सामन्य नागरिको की अन्य मौलिक अधिकारों के लिए हानिकारक हो तो संबिधानिक प्रतिकार के जरिए इसको रक्षा किआ जा सकता है।

ये नियम महान भारतीय गणतंत्र की प्रकृत मर्यादा को दर्शाता है।